Buddhism: Its Nature and Principal Teachings
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https://doi.org/10.70849/IJSCIKeywords:
बौद्ध धर्म, बुद्ध, चार आर्य सत्य, अष्टांगिक मार्ग, पंचशील, शील, समाधि, प्रज्ञा, अहिंसा, करुणा, मैत्री, उपेक्षा, विपश्यना, निर्वाण, सम्राट अशोक, विश्व शांति।Abstract
बौद्ध धर्म मानवता को दुखों से मुक्त करने की जीवन-पद्धति है। भगवान बुद्ध का जन्म 2500 वर्ष पूर्व लुम्बिनी में हुआ। उन्होंने मानव जीवन के दुखों को देखकर सत्य की खोज की और कठोर तपस्या के पश्चात बोधि वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त किया। बुद्ध ने चार आर्य सत्यों तथा अष्टांगिक मार्ग की शिक्षा दी, जिसमें दुःख, दुःख का कारण, दुःख निरोध और दुःख निरोध गामी मार्ग का प्रतिपादन किया। उन्होंने अहिंसा, करुणा, मैत्री और उपेक्षा जैसे ब्रह्मविहारों का प्रचार किया। बुद्ध की शिक्षाओं में शील, समाधि और प्रज्ञा तीन स्तंभ हैं। शील में पंचशील (अहिंसा, असत्य भाषण, चोरी, व्यभिचार और मादक पदार्थों का त्याग) प्रमुख हैं। समाधि में ध्यान एवं विपश्यना द्वारा मन की शुद्धि और प्रज्ञा में श्रुतमयी, चिंतनमयी एवं भावनामयी ज्ञान का विकास बताया गया है।
बौद्ध धर्म ने सामाजिक कुरीतियों जैसे पशुबलि, जातिवाद और अंधविश्वास का विरोध किया। इसके प्रभाव से समाज में करुणा, समानता, भाईचारा और शांति की भावना विकसित हुई। सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म का विश्वभर में प्रसार किया। आज भी इसकी शिक्षाएँ मानव को मानसिक शांति, नैतिक जीवन और वैश्विक भाईचारा स्थापित करने में सहायक हैं।
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